
टेपा सम्मेलन के लिए ग़ज़ल
Tepa Sammelan Ke Liye Ghazal
Dushyant Kumar
13 verses · ~25 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Hasya
Gyan-Dhyan Kuch Kaam Na Aaye
Balswaroop Rahi13 verses · ~1 min
ज्ञान ध्यान कुछ काम न आए हम तो जीवन-भर अकुलाए ।
पथ निहारते दृग पथराए हर आहट पर मन भरमाए ।
झूठे जग में सच्चे सुख की क्या तो कोई आस लगाए ।
देवालय हो या मदिरालय जहाँ गए जाकर पछताए ।
तड़क-भड़क संतो की ऐसी दुनियादार देख शरमाए ।
माल लूट का सबने बाँटा हम ही पड़े रहें अलसाए ।
जो बिक जाता धन्य वही है जो न बिके मूरख कहलाए ।
टिकट बाँटने के नाटक में धूर्त महानायक बन छाए ।
शिष्टाचार भ्रष्टता दोनों— ने अपने सब द्वैत मिटाए ।
जहाँ बिछी शतरंज वही ही शातिर बैठे जाल बिछाए ।
अब के यूँ खैरात बँटी है सारा किस्सा दिल बहलाए ।
दुर्जन पार लगाता नैया सज्जन किसका काम बनाए ।
राही तो सीधे-सादे है कौन भला क्या उनसे पाए ।
इति

Paired Painting
Vidura Leaving the Hastinapur Court
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Gyan-Dhyan Kuch Kaam Na Aaye carries.