
आए महंत वसंत
Aae Mahant Vasant
Sarveshwar Dayal Saxena
3 verses · ~9 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

1 verses · ~2 min
मस्ती से भरके जबकि हवा सौरभ से बरबस उलझ पड़ी तब उलझ पड़ा मेरा सपना कुछ नये-नये अरमानों से; गेंदा फूला जब बागों में सरसों फूली जब खेतों में तब फूल उठी सहस उमंग मेरे मुरझाये प्राणों में; कलिका के चुम्बन की पुलकन मुखरित जब अलि के गुंजन में तब उमड़ पड़ा उन्माद प्रबल मेरे इन बेसुध गानों में; ले नई साध ले नया रंग मेरे आंगन आया बसंत मैं अनजाने ही आज बना हूँ अपने ही अनजाने में! जो बीत गया वह बिभ्रम था, वह था कुरूप, वह था कठोर, मत याद दिलाओ उस काल की, कल में असफलता रोती है! जब एक कुहासे-सी मेरी सांसें कुछ भारी-भारी थीं, दुख की वह धुंधली परछाँही अब तक आँखों में सोती है। है आज धूप में नई चमक मन में है नई उमंग आज जिससे मालूम यही दुनिया कुछ नई-नई सी होती है; है आस नई, अभिलास नई नवजीवन की रसधार नई अन्तर को आज भिगोती है! तुम नई स्फूर्ति इस तन को दो, तुम नई नई चेतना मन को दो, तुम नया ज्ञान जीवन को दो, ऋतुराज तुम्हारा अभिनन्दन!
इति

Paired Painting
Vasant Ragini, Page from a Ragamala Series
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Basantotsav carries.