№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Radha Waiting for Krishna

Shringara

स्वर वासन्ती

Swar Vasanti

Buddhinath Mishra
2 min read 9 versesवसन्तspringप्रकृति

9 verses · ~2 min

सब्ज़परी उतरी आँगन में फूटी गन्ध सुमन बन । अनजानी डाली पर कुहके मेरा बनजारा मन ।

विकल समीर फिरे वन-वन कुण्डल में कस्तूरी भर कम्पित कलियों के अधरों पर बिछे मदिर श्रम-सीकर । ऐसी आँधी उठी वसन्ती लिपटी दिशा गगन से वल्लरियाँ द्रुम से आलिंगित स्वप्निल प्रीति सृजन से ।

किन नयनों ने क्या कर डाला सुलगा तरु का यौवन बिछुड़ रहा है वृन्त-वृन्त से मेरा अलसाया तन ।

उषा रंगिनी बाँट गई प्राची-नभ से कुंकुम जो मानस-मानस सिमटे वे उपजे अनुराग-कुसुम हो । अनहोनी कुछ हुई न फिर क्यों भाव जगे सिहरन के? अर्थ नए अँखुए-से निकले ठूँठ शब्द के तन से ।

इन्द्रधनुष के पंख लगा क्यों राधा विचरे तृण-तृण? सँवर रहा यादों की फुनगी पर जब अनब्याहा प्रण ।

दृग के कुमुद गिनें तारे या ढूँढें शशि वह निर्मम आग लगाए जल में जिसकी आँखमिचौनी का क्रम । जग की सभी व्यथाएं संचित इस अणु-से अंकुर में सत्रहवर्षी उर में ।

पीकर उनकी सुरभि सलोनी उगी मंजरी नूतन हर मधुकण में प्रतिबिम्बित कर्पूरी उनका आनन ।

कौन बुलाकर द्वार पूजती वायस साँझ-सबेरे बचा न अब यह स्नेह जलाये पय से दिये कनेरे । कितने पीर-पतंगों को उसने अन्तर में बाँधा ले उधार उल्लास कि जिस आँचल ने मयन अराधा ।

फहराएँ उनकी समाधि पर कुसमायुध के केतन खुला रहा जिनका अनन्त की ओर सदा वातायन ।

इति

Buddhinath Mishra

The Poet

बुद्धिनाथ मिश्र

Buddhinath Mishra

Radha Waiting for Krishna

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Radha Waiting for Krishna

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Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Swar Vasanti carries.