
आज के बिछुड़े न जाने कब मिलेंगे
Aaj Ke Bichhude Na Jane Kab Milenge
Narendra Sharma
10 verses · ~38 lines · 2 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
Loading the archive
MM · XXVI

Karuna
Sath Chalte Aa Rahe Hain Paas Aa Sakte Nahi
Bashir Badr9 verses · ~2 min
साथ चलते आ रहे हैं पास आ सकते नहीं इक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं
देने वाले ने दिया सब कुछ अजब अंदाज से सामने दुनिया पड़ी है और उठा सकते नहीं
इस की भी मजबूरियाँ हैं, मेरी भी मजबूरियाँ हैं रोज मिलते हैं मगर घर में बता सकते नहीं
आदमी क्या है गुजरते वक्त की तसवीर है जाने वाले को सदा देकर बुला सकते नहीं
किस ने किस का नाम ईंट पे लिखा है खून से इश्तिहारों से ये दीवारें छुपा सकते नहीं
उस की यादों से महकने लगता है सारा बदन प्यार की खुशबू को सीने में छुपा सकते नहीं
राज जब सीने से बाहर हो गया अपना कहाँ रेत पे बिखरे हुए आँसू उठा सकते नहीं
शहर में रहते हुए हमको जमाना हो गया कौन रहता है कहाँ कुछ भी बता सकते नहीं
पत्थरों के बर्तनों में आँसू को क्या रखें फूल को लफ्जों के गमलों में खिला सकते नहीं
इति

Paired Painting
Stolen Interview
Open the viewer →
If this held you
Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Sath Chalte Aa Rahe Hain Paas Aa Sakte Nahi carries.