№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Stolen Interview

Karuna

साथ चलते आ रहे हैं पास आ सकते नहीं

Sath Chalte Aa Rahe Hain Paas Aa Sakte Nahi

Bashir Badr
2 min read 9 versesनदीriverकिनारा

9 verses · ~2 min

साथ चलते आ रहे हैं पास आ सकते नहीं इक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं

देने वाले ने दिया सब कुछ अजब अंदाज से सामने दुनिया पड़ी है और उठा सकते नहीं

इस की भी मजबूरियाँ हैं, मेरी भी मजबूरियाँ हैं रोज मिलते हैं मगर घर में बता सकते नहीं

आदमी क्या है गुजरते वक्त की तसवीर है जाने वाले को सदा देकर बुला सकते नहीं

किस ने किस का नाम ईंट पे लिखा है खून से इश्तिहारों से ये दीवारें छुपा सकते नहीं

उस की यादों से महकने लगता है सारा बदन प्यार की खुशबू को सीने में छुपा सकते नहीं

राज जब सीने से बाहर हो गया अपना कहाँ रेत पे बिखरे हुए आँसू उठा सकते नहीं

शहर में रहते हुए हमको जमाना हो गया कौन रहता है कहाँ कुछ भी बता सकते नहीं

पत्थरों के बर्तनों में आँसू को क्या रखें फूल को लफ्जों के गमलों में खिला सकते नहीं

इति

Bashir Badr

The Poet

बशीर बद्र

Bashir Badr

Stolen Interview

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Stolen Interview

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Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Sath Chalte Aa Rahe Hain Paas Aa Sakte Nahi carries.