
सुबह का झरना
Subah Ka Jharna
Bashir Badr
5 verses · ~10 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shringara
Main Kab Kahata Hun Wo Achha Bahut Hai
Bashir Badr8 verses · ~1 min
मै कब कहता हूँ वो अच्छा बहुत है मगर उसने मुझे चाहा बहुत है
खुदा इस शहर को महफूज़ रखे ये बच्चों की तरह हँसता बहुत है
मै तुझसे रोज़ मिलना चाहता हूँ मगर इस राह में खतरा बहुत है
मेरा दिल बारिशों में फूल जैसा ये बच्चा रात में रोता बहुत है
इसे आंसू का एक कतरा न समझो कुँआ है और ये गहरा बहुत है
उसे शोहरत ने तनहा कर दिया है समंदर है मगर प्यासा बहुत है
मै एक लम्हे में सदियाँ देखता हूँ तुम्हारे साथ एक लम्हा बहुत है
मेरा हँसना ज़रूरी हो गया है यहाँ हर शख्स संजीदा बहुत है
इति

Paired Painting
Terrace by the Sea
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Main Kab Kahata Hun Wo Achha Bahut Hai carries.