№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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The Banished Yaksha

Shringara

मैं अकेला और पानी बरसता है

Main Akela Aur Paani Barasta Hai

Shivamangal Singh 'Suman'
1 min read 4 versesविरहseparationबारिश

4 verses · ~1 min

मैं अकेला और पानी बरसता है

प्रीती पनिहारिन गई लूटी कहीं है, गगन की गगरी भरी फूटी कहीं है, एक हफ्ते से झड़ी टूटी नहीं है, संगिनी फिर यक्ष की छूटी कहीं है, फिर किसी अलकापुरी के शून्य नभ में कामनाओं का अँधेरा सिहरता है।

मोर काम-विभोर गाने लगा गाना, विधुर झिल्ली ने नया छेड़ा तराना, निर्झरों की केलि का भी क्या ठिकाना, सरि-सरोवर में उमंगों का उठाना, मुखर हरियाली धरा पर छा गई जो यह तुम्हारे ही हृदय की सरसता है।

हरहराते पात तन का थरथराना, रिमझिमाती रात मन का गुनगुनाना, क्या बनाऊँ मैं भला तुमसे बहाना, भेद पी की कामना का आज जाना, क्यों युगों से प्यास का उल्लास साधे भरे भादों में पपीहा तरसता है। मैं अकेला और पानी बरसता है।

इति

Shivamangal Singh 'Suman'

The Poet

शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

Shivamangal Singh 'Suman'

The Banished Yaksha

Paired Painting

The Banished Yaksha

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Main Akela Aur Paani Barasta Hai carries.