
पुनः चमकेगा दिनकर
Punah Chamkega Dinkar
Atal Bihari Vajpayee
1 verse · ~5 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

8 verses · ~2 min
उन्होंने कहा- "हैण्ड्स अप!" एक-एक अंग फोड़ कर मेरा उन्होंने तलाशी ली!
मेरी तलाशी में मिला क्या उन्हें? थोड़े से सपने मिले और चांद मिला सिगरेट की पन्नी-भर, माचिस-भर उम्मीद, एक अधूरी चिट्ठी जो वे डीकोड नहीं कर पाये
क्योंकि वह सिन्धुघाटी सभ्यता के समय मैंने लिखी थी- एक अभेद्य लिपि में- अपनी धरती को-
"हलो धरती, कहीं चलो धरती, कोल्हू का बैल बने गोल-गोल घूमें हम कब तक? आओ, कहीं आज घूरते हैं तिरछा एक अगिनबान बन कर इस ग्रह-पथ से दूर!
उन्होंने चिट्ठी मरोड़ी और मुझे कोंच दिया काल-कोठरी में! अपनी क़लम से मैं लगातार खोद रही हूँ तब से काल-कोठरी में सुरंग!
कान लगा कर सुनो- धरती की छाती में क्या बज रहा है! क्या कोई छुपा हुआ सोता है? और दूर उधर- पार सुरंग के- वहाँ दिख रही है कि नहीं दिखती एक पतली रोशनी और खुला-खिला घास का मैदान! कैसी ख़ुशनुमा कनकनी है! हो सकता है - एक लोकगीत गुज़रा हो कल रात इस राह से! नन्हें-नन्हें पाँव उड़ते हुए से गए हैं ओस नहाई घास पर!
फिलहाल, बस एक परछाईं ओस के होंठों पर थरथराती सी बची है
पहला एहसास किसी सृष्टि का देखो तो- टप-टप टपकता है कैसे!
इति

Paired Painting
Release of Vasudeva and Devaki by Krishna
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Talashi carries.