№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Gangavatarana

Veera

हे! हिन्दी के रुद्रावतार

He Hindi Ke Rudravatar

Amitabh Tripathi ‘Amit’
1 min read 6 versesप्रशंसाtributeसूर्यकांत त्रिपाठी निराला

6 verses · ~1 min

हे! हिन्दी के रुद्रावतार! भाषानिधि अम्बुधि महाकार कविता-नवीन के शिल्पकार जीवनी शक्ति जो दुर्निवार अर्पित तुमको यह पुष्पहार चन्दन है!

गंगा-यमुना उच्छ्‍वसित धार कहती निजस्मृति को उघार तुमसे भवाब्धि भी गया हार हे पुरुष केशरी नमस्कार करता युग तुमको बार-बार वन्दन है!

जड़ता-गज-मस्तक पर प्रहार कर, सिंहनाद सा स्वर उचार वह नई चेतना, नव प्रसार कविता जब पहुँची दीन-द्वार स्लथ भिक्षुक की बेबस पुकार क्रन्दन है!

उद्भट ज्ञानी थे तुम भगवद्गीता के देखे कैसे रामाभ नयन सीता के झेले थे तुमने विरह स्वपरिणीता के संतप्त-शोक निज-कन्या सुपुनीता के कवि अश्रु तुम्हारा, अश्रु नहीं अंजन है!

हे! सरस्वती के पुत्र, स्वयं चतुरानन ने गढ़ा तुम्हे देकर गर्वीला आनन लेखनी-विराजे आकर स्वयं गजानन वपु जैसे कवि का रूप धरे पंचानन बिखरी कविता-कौमुदी-कीर्ति जिस कानन नन्दन है!

हे! हिन्दी के रुद्रावतार वन्दन है!

इति

Amitabh Tripathi ‘Amit’

The Poet

अमिताभ त्रिपाठी 'अमित'

Amitabh Tripathi ‘Amit’

Gangavatarana

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what He Hindi Ke Rudravatar carries.