№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Subhadra and Arjuna

Shringara

एक जीवन जी गया मैं भी तुम्हारे साथ देखो

Ek Jeevan Ji Gaya Main Bhi Tumhare Saath Dekho

Amitabh Tripathi ‘Amit’
2 min read 4 versesजीवनlifeभावनाएँ

4 verses · ~2 min

एक जीवन जी गया मैं भी तुम्हारे साथ देखो मुदित मन मधु पी गया मैं भी तुम्हारे साथ देखो

थीं बहुत सी वर्जनाएं, सजग करती सी कथाएं किन्तु हर प्रतिबन्ध पर विजयी हुई थीं भावनाएं लोक की उन रीतियों का, कुछ पुरातन नीतियों का अतिक्रमण कर ही गया मैं भी तुम्हारे साथ देखो एक जीवन जी गया...

जब असंगत संधियों में छिपा इक अनुताप सा है हृदयपथ का अनुसरण फिर क्यों जगत में पाप सा है किन्तु जग-संवेदना पर, दबा कर निज वेदना को होंठ अपने सी गया मैं भी तुम्हारे साथ देखो एक जीवन जी गया...

समय क्या कर भी सकेगा, हृदय के अनुबंध ढीले गरल पीने की कथा, कहते रहेंगें कंठ नीले किन्तु आकुल निलय से फिर, आस की लघु दीपिका में जला इक बाती गया मैं भी तुम्हारे साथ देखो एक जीवन जी गया...

इति

Amitabh Tripathi ‘Amit’

The Poet

अमिताभ त्रिपाठी 'अमित'

Amitabh Tripathi ‘Amit’

Subhadra and Arjuna

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Subhadra and Arjuna

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