
स्वयं अपने हाथ से श्रृंगार सारा
Svayam Apne Hath Se Shringar Sara
Amitabh Tripathi ‘Amit’
10 verses · ~35 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shringara
Ek Bhool Aisi Jo Mere Jeevan Ka
Amitabh Tripathi ‘Amit’4 verses · ~1 min
एक भूल ऐसी जो मेरे जीवन का शृंगार हो गयी। भव-जलनिधि में भटकी नौका एक लहर से पार हो गयी
संचित पुण्य युगों का जैसे स्वयं मुझे फल देने आया आतप दग्ध पथिक पर जैसे कोई बदली कर दे छाया मेरे मानस की रचना ज्यों मूर्तिमान साकार हो गयी एक भूल ऐसी...
विधना के विधान अनजाने, उसका लिखा कौन पहचाने कब अदृष्य बन्धन में कैसे, पूर्ण-अपरिचित बँधे अजाने अपनी अनुकृति अन्य हृदय में अपना ही विस्तार हो गयी एक भूल ऐसी...
कभी स्वप्नवत लगी जुन्हाई, कभी चन्द्र की जल-परछाईं देख रहा हूँ विस्मय से ज्यों भिक्षुक ने पारस-मणि पाई पावस ऋतु की तृषित सीप पर स्वाती की बौंछार हो गयी एक भूल ऐसी...
इति

Paired Painting
Shantanu and Satyavati
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ek Bhool Aisi Jo Mere Jeevan Ka carries.