№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Urvashi Abandons Pururavas

Karuna

आज भी वहीं खड़ा उद्दीप्त

Aaj Bhi Wahin Khada Uddipt

Amitabh Tripathi ‘Amit’
2 min read 9 versesउदासीsadnessस्मृति

9 verses · ~2 min

आज भी वहीं खड़ा उद्दीप्त विश्वधारा में मैं निरुपाय खोजता हूँ बस एक आलम्ब यजन करने का तुच्छ उपाय

निशा है आज हुई शशि-मुक्त किरण भी आशा की है लुप्त जानता होगा विश्वाधार जीव फिर क्यों शरीर से युक्त

संकलित है स्मृति अवशेष भग्न उस रेत-भीति के चिह्न जिसे देने को नूतन रूप हो गये थे दो पथिक अभिन्न

जीव का प्रेम जीव से किन्तु शरीरों का कैसा भ्रम जाल रहा करता जल सागर मध्य हो सका क्या जलगत पाताल

हवा गति हेतु चाहती दाब नदी को नीचे तल की चाह किन्तु भौतिक नियमों से दूर भावनाओं का अतुल प्रवाह

जिसे पाने में लगते वर्ष बीत जाते कितने मधुमास वही क्षण रुकते यदि पल चार न हटता मन से निज विश्वास

हो गई उषा भी तमलिप्त खो गया उसका भी अभिमान क्षितिज के बीच बैठती कभी पहनकर कुछ अरुणिम परिधान

इन्दु ने अपनी किरण समेट समय से पूर्व किया प्रस्थान साथ देने तारा-नक्षत्र हो गये हैं सब अन्तर्ध्यान

इस अंधेरे में किसी के नाम का दीपक जलाये ढूँढता बिछड़े स्वजन को भूल वो इस राह आये भूल वो इस राह आये।

इति

Amitabh Tripathi ‘Amit’

The Poet

अमिताभ त्रिपाठी 'अमित'

Amitabh Tripathi ‘Amit’

Urvashi Abandons Pururavas

Paired Painting

Urvashi Abandons Pururavas

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Aaj Bhi Wahin Khada Uddipt carries.