
मत मंसूबे बाँध बटोही, सफर बड़ा बेढंगा है
Mat Mansube Bandh Batohi, Safar Bada Bedhanga Hai
Amitabh Tripathi ‘Amit’
7 verses · ~16 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Karuna
Mujhe Yad Aayi Dharti Ki
Amitabh Tripathi ‘Amit’5 verses · ~2 min
मुझे याद आई धरती की।
मैनें देखा, मैनें देखा क्षीणकाय तरुणी, वृद्धा सी लुंचित केश, वसन मटमैले, निर्वसना सी घुटनों को बाँहों में कस कर देह सकेले मुझे याद आई गंगा की।
मैनें देखा, मैनें देखा बीड़ी से चिपके बचपन को कन्धे पर बोरा लटकाये, मनुज-सुमन को सड़ते कचरे से जो बीन रहा जीवन को मुझे याद आई प्रायः सूकर छौनों की।
मैनें देखा, मैनें देखा कमरे की दीवाल-घड़ी का सुस्त पेण्डुलम धक्कों से ठेलता समय को, धीरे-धीरे टन-टन की ध्वनि भी आती ज्यों दूर क्षितिज से मुझे याद आई दादी की।
मैनें देखा, मैनें देखा गया न देखा फिर कुछ मुझसे दिनकर के वंशज समस्त ले रहे वज़ीफे अंधियारों से मंचों पर सन्नाटा फैला, आती है आवाज़ सिर्फ़ अब, गलियारों से आँखें करके बन्द सोचता हूँ अच्छा है नेत्रहीन होने का सुख कितना सच्चा है तब से आँख खोलने में भी डर लगता है रहता है कुछ और, और मुझको दिखता है।
इति

Paired Painting
Dussasana Humiliating Draupadi
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Mujhe Yad Aayi Dharti Ki carries.