№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Shantanu and Satyavati

Shringara

मछुए का गीत

Machue Ka Geet

Sumitranandan Pant
2 min read 6 versesमछुआfishermanगीत

6 verses · ~2 min

प्रेम की बंसी लगी न प्राण!

तू इस जीवन के पट भीतर कौन छिपी मोहित निज छवि पर? चंचल री नव यौवन के पर, प्रखर प्रेम के बाण! प्रेम की बंसी लगी न प्राण!

गेह लाड की लहरों का चल, तज फेनिल ममता का अंचल, अरी डूब उतरा मत प्रतिपल, वृथा रूप का मान! प्रेम की बंसी लगी न प्राण!

आए नव घन विविध वेश धर, सुन री बहुमुख पावस के स्वर, रूप वारी में लीन निरन्तर, रह न सकेगी, मान! प्रेम की बंसी लगी न प्राण!

नाँव द्वार आवेगी बाहर, स्वर्ण जाल में उलझ मनोहर, बचा कौन जग में लुक छिप कर बिंधते सब अनजान! प्रेम की बंसी लगी न प्राण!

घिर घिर होते मेघ निछावर, झर झर सर में मिलते निर्झर, लिए डोर वह अग जग की कर, हरता तन मन प्राण! प्रेम की बंसी लगी न प्राण!

इति

Sumitranandan Pant

The Poet

सुमित्रानंदन पंत

Sumitranandan Pant

Shantanu and Satyavati

Paired Painting

Shantanu and Satyavati

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Machue Ka Geet carries.