
नौका-विहार
Nauka Vihar
Sumitranandan Pant
6 verses · ~53 lines · 2 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shringara
Chhod Drumon Ki Mridu Chhaya
Sumitranandan Pant1 verses · ~1 min
छोड़ द्रुमों की मृदु छाया, तोड़ प्रकृति से भी माया, बाले! तेरे बाल-जाल में कैसे उलझा दूँ लोचन? भूल अभी से इस जग को! तज कर तरल तरंगों को, इन्द्रधनुष के रंगों को, तेरे भ्रू भ्रंगों से कैसे बिधवा दूँ निज मृग सा मन? भूल अभी से इस जग को! कोयल का वह कोमल बोल, मधुकर की वीणा अनमोल, कह तब तेरे ही प्रिय स्वर से कैसे भर लूँ, सजनि, श्रवण? भूल अभी से इस जग को! ऊषा-सस्मित किसलय-दल, सुधा-रश्मि से उतरा जल, ना, अधरामृत ही के मद में कैसे बहला दूँ जीवन? भूल अभी से इस जग को!
इति

Paired Painting
Rama Spurns Surpanakha
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Chhod Drumon Ki Mridu Chhaya carries.