
धूप
Dhoop
Shriprakash Shukla
5 verses · ~6 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

7 verses · ~1 min
सुबह बेला एक मुटठी रेत में उठता हुआ वह एक तिनका चमक उठता है चांदनी सदृश एक बूंद ओस के साथ
सुदूर घिसटती हुई टेन की आवाज़ कुहरे को ठेलती हुई छिक-छिक करती
स्वप्न कुछ साकी जैसे इधर-उधर विखरे अलसाती नदी उठ रही है तट सुहाने छोड़कर
एक मुटठी रेत चहुँ ओर वात प्रसरित खेत हैं बस खेत
कूचियाँ ये भर रही कुछ रंग सूर्य है कि सिर नवाता पाँव छूता दे रहा है रेत को कुछ अंग
लोग हैं कि आ रहे रुक रहे झुक रहे देख इनके ढंग!
रचनाकाल: 29.01.2008
इति

Paired Painting
Nasik Scene (III of IV)
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Reta Mein Subah carries.