
बार-बार आऊँगा
Bara Bara Aunga
Pratibha Saxena
31 verses · ~146 lines · 7 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Veera
Tumne Kahan Lada Hai Koi Yuddh
Shalabh Shriram Singh8 verses · ~1 min
कमज़ोर घोड़ों पर चढ़कर युद्ध नहीं जीते गए कभी कमज़ोर तलवार की धार से मरते नहीं है दुश्मन कमज़ोर कलाई के बूते उठता नहीं है कोई बोझ
भयानक हैं जीवन के युद्ध भयानक है जीवन के शत्रु भयानक हैं जीवन के बोझ
तुमने कहाँ लड़ा है कोई यद्ध? कहाँ उठाई है तलवार अभी तुमनें? कहाँ संभाला है तुमने कोई बोझ?
यथार्थ के पत्थर कल्पना की क्यारियों को तहस-नहस कर देते हैं।
कद्दावर घोड़ों मजबूत तलवारों दमदार कलाईयों के बिना मैदान मारने की बात बे-मानी है।
आत्महत्या का रास्ता उधर से भी है जिधर से गुजरने की नासमझ तैयारी में रात को दिन कहने की जिद कर रही हो तुम।
युद्ध कमज़ोर घोड़ों पर चढ़कर कभी नहीं जीते गए
रचनाकाल: 1992 मसोढ़ा
इति

Paired Painting
Rajput Warrior on Horseback
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Tumne Kahan Lada Hai Koi Yuddh carries.