№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Rajput Warrior on Horseback

Veera

तुमने कहाँ लड़ा है कोई युद्ध

Tumne Kahan Lada Hai Koi Yuddh

Shalabh Shriram Singh
1 min read 8 versesयुद्धतलवारघोड़े

8 verses · ~1 min

कमज़ोर घोड़ों पर चढ़कर युद्ध नहीं जीते गए कभी कमज़ोर तलवार की धार से मरते नहीं है दुश्मन कमज़ोर कलाई के बूते उठता नहीं है कोई बोझ

भयानक हैं जीवन के युद्ध भयानक है जीवन के शत्रु भयानक हैं जीवन के बोझ

तुमने कहाँ लड़ा है कोई यद्ध? कहाँ उठाई है तलवार अभी तुमनें? कहाँ संभाला है तुमने कोई बोझ?

यथार्थ के पत्थर कल्पना की क्यारियों को तहस-नहस कर देते हैं।

कद्दावर घोड़ों मजबूत तलवारों दमदार कलाईयों के बिना मैदान मारने की बात बे-मानी है।

आत्महत्या का रास्ता उधर से भी है जिधर से गुजरने की नासमझ तैयारी में रात को दिन कहने की जिद कर रही हो तुम।

युद्ध कमज़ोर घोड़ों पर चढ़कर कभी नहीं जीते गए

रचनाकाल: 1992 मसोढ़ा

इति

Shalabh Shriram Singh

The Poet

शलभ श्रीराम सिंह

Shalabh Shriram Singh

Rajput Warrior on Horseback

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Rajput Warrior on Horseback

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