
हँसी आ रही है
Hansi Aa Rahi Hai
Bhawani Prasad Mishra
6 verses · ~10 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

6 verses · ~1 min
तमाशा बनने की तैयारी ख़त्म हुई तमाशा बन गया है अब एक पूरा का पूरा आदमी |
नाराज़ लोग ख़ुश हुए सारे के सारे दीदा-फाड़ अंदाज़ में देखते हुए उसकी ओर लगाते हुए कहकहा पीटते हुए ताली अपनी-अपनी थाली बजाने लगे है अब |
तमाशा बना आदमी बदलता है तमाशबीनों को तमाशे में इसी तरह बना कर दीदा-फाड़ लगवा कर कहकहा पिटवा कर ताली बजवा कर सबसे अपनी-अपनी थाली |
आदमी को तमाशे की शक्ल में देखने की एक जायज और बेहतर सज़ा है यह |
रचनाकाल: 29.06.1996, विदिशा
शलभ श्रीराम सिंह की यह रचना उनकी निजी डायरी से कविता कोश को चित्रकार और हिन्दी के कवि कुँअर रवीन्द्र के सहयोग से प्राप्त हुई। शलभ जी मृत्यु से पहले अपनी डायरियाँ और रचनाएँ उन्हें सौंप गए थे।
इति

Paired Painting
Draupadi Vastraharan
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Saza carries.