
अयाचित
Ayachit
Anamika
4 verses · ~11 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

7 verses · ~1 min
बाइबिल नहीं पढ़ी मैंने नहीं, कुरान नहीं गीता नहीं पढ़ी मैंने
पढ़ा तुमको खुद को पढ़ा मैंने
चढ़ा एसे पहाड़ पर जिस पर शायद ही चढ़ा हो कोई ऊँचाई ऐसी कि अश-अश कर उठे सितारे
नीचे जमीन को दूर-दूर तक पता नहीं यहाँ एक आग जल रही है निकल रहे हैं लपटों से हमी-हम बार-बार अपनी पुकारों के प्रत्युतर में
बाइबिल नहीं पढ़ी मैनें
रचनाकाल: 1993
शलभ श्रीराम सिंह की यह रचना उनकी निजी डायरी से कविता कोश को चित्रकार और हिन्दी के कवि कुँअर रवीन्द्र के सहयोग से प्राप्त हुई। शलभ जी मृत्यु से पहले अपनी डायरियाँ और रचनाएँ उन्हें सौंप गए थे।
इति

Paired Painting
Kanchenjunga
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Padhai carries.