
विध्वंस का स्वर्ग
Vidhvans Ka Swarg
Shalabh Shriram Singh
7 verses · ~16 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

6 verses · ~2 min
फिर हुआ पृथ्वी पर एक नए नर्क का निर्माण विपत्ति की चपेट में आई भाषा संकट के घेरे में आई अभिव्यक्ति होंठों से पुतलियों की और सरकने लगे शब्द
फिर हुआ पृथ्वी पर नए नर्क का निर्माण विरूपता की आधुनिकता को बरकरार रखने के लिए बरकरार रखने के लिए विकलांगता की अस्मिता चिपचिपी काली बारिश की पहचान पक्की करने के लिए
फिर हुआ पृथ्वी पर एक नए नर्क का निर्माण आदमी की चीख़ और बमों के धमाकों के बीच सुरक्षित रखने के लिए अपना जातीय संगीत आदेशवर्षी कंठों ने गया सर्वनाश का युगल गान
विध्वंस की तलछट से बना नर्क का यह नमूना संसार के सर्वाधिक सभ्य और जिद्दी हाथों ने तैयार किया पृथ्वी पर एक नये नर्क का निर्माण हुआ फिर
रचनाकाल: 23.10.1991
शलभ श्रीराम सिंह की यह रचना उनकी निजी डायरी से कविता कोश को चित्रकार और हिन्दी के कवि कुँअर रवीन्द्र के सहयोग से प्राप्त हुई। शलभ जी मृत्यु से पहले अपनी डायरियाँ और रचनाएँ उन्हें सौंप गए थे।
इति

Paired Painting
Forest Fire with Animals and Onlookers
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Naya Nark carries.