№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Forest Fire with Animals and Onlookers

Raudra

नया नर्क

Naya Nark

Shalabh Shriram Singh
2 min read 6 versesनर्कपृथ्वीविपत्ति

6 verses · ~2 min

फिर हुआ पृथ्वी पर एक नए नर्क का निर्माण विपत्ति की चपेट में आई भाषा संकट के घेरे में आई अभिव्यक्ति होंठों से पुतलियों की और सरकने लगे शब्द

फिर हुआ पृथ्वी पर नए नर्क का निर्माण विरूपता की आधुनिकता को बरकरार रखने के लिए बरकरार रखने के लिए विकलांगता की अस्मिता चिपचिपी काली बारिश की पहचान पक्की करने के लिए

फिर हुआ पृथ्वी पर एक नए नर्क का निर्माण आदमी की चीख़ और बमों के धमाकों के बीच सुरक्षित रखने के लिए अपना जातीय संगीत आदेशवर्षी कंठों ने गया सर्वनाश का युगल गान

विध्वंस की तलछट से बना नर्क का यह नमूना संसार के सर्वाधिक सभ्य और जिद्दी हाथों ने तैयार किया पृथ्वी पर एक नये नर्क का निर्माण हुआ फिर

रचनाकाल: 23.10.1991

शलभ श्रीराम सिंह की यह रचना उनकी निजी डायरी से कविता कोश को चित्रकार और हिन्दी के कवि कुँअर रवीन्द्र के सहयोग से प्राप्त हुई। शलभ जी मृत्यु से पहले अपनी डायरियाँ और रचनाएँ उन्हें सौंप गए थे।

इति

Shalabh Shriram Singh

The Poet

शलभ श्रीराम सिंह

Shalabh Shriram Singh

Forest Fire with Animals and Onlookers

Paired Painting

Forest Fire with Animals and Onlookers

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Naya Nark carries.