
कुछ नहीं कहते
Kuch Nahin Kahte
Divik Ramesh
8 verses · ~9 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Bhayanaka
Murgi Kudkudayi Hai
Shalabh Shriram Singh5 verses · ~2 min
मुर्गी कुड़कुड़ाई है सहेली मुर्गी से अपने जोड़े का चर्चा कर रही है शायद शायद मन पसंद बाँके मुर्गे के लिए कोई पैगाम दे रही है वह या फिर आदमिओं की दुनिया में बचे रहने की किसी कोशिश पर मशविरा कर रही है भरोसेमंद सखी के साथ की प्लेट में मसाले की खुशबू का हिस्सा बनना अशुभ है मुर्गों के लिए अशुभ है नाश्ते में मुर्गियों के अंडों का शामिल किया जाना
मुर्गी कुड़कड़ाई है बिल्ली या बाज के कहीं बिलकुल पास होने का संकेत है यह नेवला भी हो सकता है वहाँ साँप भी दोनों साथ-साथ नहीं होंगे वहां मुर्गी की आवाज़ के दायरे में वहाँ केवल भय है सतर्क भय केवल अपनी बिरादरी और बच्चों को सावधान करता
मुर्गी कुड़कुड़ाई है दाने छिड़के जा रहे हैं आस-पास चज़ों को तालीम देने का वक़्त है यह मुर्गी के लिए ज़िन्दगी और अनाज के सरोकार पर कुछ बोल रही है वह मुर्गे के लिए हिदायत भी हो सकती है उसमें कि चूजों का हिस्सा न खाए वह
रचनाकाल: 1991 विदिशा
शलभ श्रीराम सिंह की यह रचना उनकी निजी डायरी से कविता कोश को चित्रकार और हिन्दी के कवि कुँअर रवीन्द्र के सहयोग से प्राप्त हुई। शलभ जी मृत्यु से पहले अपनी डायरियाँ और रचनाएँ उन्हें सौंप गए थे।
इति

Paired Painting
Draupadi and Simhika
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Murgi Kudkudayi Hai carries.