№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Nala and Damayanti

Karuna

ताजमहल

Tajmahal

Sahir Ludhianvi
2 min read 12 versesताजमहलtaj mahalप्रेम

12 verses · ~2 min

ताज तेरे लिये इक मज़हर-ए-उल्फ़त[1]ही सही तुझको इस वादी-ए-रंगीं[2]से अक़ीदत[3] ही सही

मेरी महबूब[4] कहीं और मिला कर मुझ से!

बज़्म-ए-शाही[5] में ग़रीबों का गुज़र क्या मानी सब्त[6] जिस राह में हों सतवत-ए-शाही[7] के निशाँ उस पे उल्फ़त भरी रूहों का सफ़र क्या मानी

मेरी महबूब! पस-ए-पर्दा-ए-तशहीर-ए-वफ़ा[8]

तू ने सतवत[9] के निशानों को तो देखा होता मुर्दा शाहों के मक़ाबिर[10] से बहलने वाली अपने तारीक[11] मकानों को तो देखा होता

अनगिनत लोगों ने दुनिया में मुहब्बत की है कौन कहता है कि सादिक़[12] न थे जज़्बे[13] उनके लेकिन उन के लिये तशहीर[14] का सामान नहीं क्योंकि वो लोग भी अपनी ही तरह मुफ़लिस[15] थे

ये इमारात-ओ-मक़ाबिर,[16] ये फ़सीलें,[17]ये हिसार[18] मुतल-क़ुलहुक्म[19] शहंशाहों की अज़मत के सुतूँ[20] सीना-ए-दहर[21]के नासूर हैं ,कुहना[22] नासूर जज़्ब है[23] जिसमें तेरे और मेरे अजदाद[24] का ख़ूँ

मेरी महबूब! उन्हें भी तो मुहब्बत होगी जिनकी सन्नाई[25] ने बख़्शी[26] है इसे शक्ल-ए-जमील[27] उन के प्यारों के मक़ाबिर[28] रहे बेनाम-ओ-नमूद[29] आज तक उन पे जलाई न किसी ने क़ंदील[30]

ये चमनज़ार[31] ये जमुना का किनारा ये महल ये मुनक़्क़श [32]दर-ओ-दीवार, ये महराब ये ताक़

इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर हम ग़रीबों की मुहब्बत का उड़ाया है मज़ाक़

मेरी महबूब कहीं और मिला कर मुझ से!

शब्दार्थ:

इति

Sahir Ludhianvi

The Poet

साहिर लुधियानवी

Sahir Ludhianvi

Nala and Damayanti

Paired Painting

Nala and Damayanti

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Tajmahal carries.