
तेरी आवाज़
Teri Awaaz
Sahir Ludhianvi
10 verses · ~36 lines · 2 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

6 verses · ~2 min
आओ कि कोई ख़्वाब बुनें कल के वास्ते वरना ये रात आज के संगीन[1] दौर[2] की डस लेगी जान-ओ-दिल को कुछ ऐसे कि जान-ओ-दिल ता-उम्र[3] फिर न कोई हसीं ख़्वाब बुन सकें
गो हम से भागती रही ये तेज़-गाम[4] उम्र ख़्वाबों के आसरे पे कटी है तमाम उम्र
ज़ुल्फ़ों के ख़्वाब, होंठों के ख़्वाब, और बदन के ख़्वाब मेराज-ए-फ़न[5] के ख़्वाब, कमाल-ए-सुख़न[6] के ख़्वाब
तहज़ीब-ए-ज़िन्दगी[7] के, फ़रोग़-ए-वतन[8] के ख़्वाब ज़िन्दाँ[9] के ख़्वाब, कूचा-ए-दार-ओ-रसन[10] के ख़्वाब
ये ख़्वाब ही तो अपनी जवानी के पास थे ये ख़्वाब ही तो अपने अमल[11] के असास[12] थे ये ख़्वाब मर गये हैं तो बे-रंग है हयात[13] यूँ है कि जैसे दस्त-ए-तह-ए-सन्ग[14] है हयात
आओ कि कोई ख़्वाब बुनें कल के वास्ते वरना ये रात आज के संगीन दौर की डस लेगी जान-ओ-दिल को कुछ ऐसे कि जान-ओ-दिल ता-उम्र फिर न कोई हसीं ख़्वाब बुन सकें
इति

Paired Painting
Savitri Pleading with Yama for the Life of Satyavan
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Aao Ki Koi Khwab Bunen carries.