
ख़ुशी
Khushi
Divik Ramesh
8 verses · ~13 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

3 verses · ~1 min
एक बची खुची खुशी को थैले में डाल जब लौटता है वह उसके सहारे तो ज़िन्दगी का अगला दिन पाट देता है उसकी रात रंगीन सपनों से - सपने जो अधूरी आंकांक्षाओं की पूर्ति ही नहीं एक संकल्पित भविष्य भी होते हैं।
समझौते पर विवश आदमी से बस इतनी ही प्रार्थना है मेरी कि बचे न बचे कुछ पर बची रहे हर शाम उसके पास एक थोड़ी-सी खुशी - उसका सहारा जिसे थैले में डाल लौट सके वह घर डग भरता उत्सुक
कि बचे रहें उसके पास भी कुछ सपने कि बीते न उसकी रात सूनी आँखों में।
इति

Paired Painting
Rama, Sita and Lakshmana in Exile
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ek Bachi Hui Khushi carries.