№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Lady Playing the Swarbat

Shanta

किशोरी अमोनकर

Kishori Amonkar

Rituraj
1 min read 4 versesसंगीतmusicकिशोरी अमोनकर

4 verses · ~1 min

न जाने किस बात पर हँस रहे थे लोग प्रेक्षागृह खचाखच भरा था जनसंख्या-बहुल देश में यह कोई अनहोनी घटना नहीं थी

प्रतीक्षा थी विलंबित आलाप की तरह कब शुरू होगा स्थायी और कब अंतरा कब भूप की सवारी निकालेंगी किशोरी जी शुद्ध गंधार समय की पीठ चीरकर अंतरिक्ष में विलीन हो जाएगा फिर लौटेगा किसी पहाड़ से धैवत किसी पंचम को हलके से छूता हुआ रिखब को जाएगा

किशोरी जी हमेशा इसी तरह सुरों की वेदना के शीर्ष पर पहुँचती हैं, लौटती हैं पर वे अभी तक आईं क्यों नहीं? स्वर काँपने और सरपट दौड़ने के लिए बेचैन हैं...

लो वे आ ही गईं हलकी-सी खाँसी और तुनकमिजाजी का जुकाम है डाँटकर बोलीं यह क्या हँसने का समय है?

इति

Rituraj

The Poet

ऋतुराज

Rituraj

Lady Playing the Swarbat

Paired Painting

Lady Playing the Swarbat

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If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kishori Amonkar carries.