№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Reclining Nair Lady

Shanta

किताब पढ़कर रोना

Kitab Padhkar Rona

Raghuvir Sahay
1 min read 3 versesकिताबbookरोना

3 verses · ~1 min

रोया हूँ मैं भी किताब पढकर के पर अब याद नहीं कौन-सी शायद वह कोई वृत्तांत था पात्र जिसके अनेक बनते थे चारों तरफ से मंडराते हुए आते थे पढता जाता और रोता जाता था मैं क्षण भर में सहसा पहचाना यह पढ़ता कुछ और हूँ रोता कुछ और हूँ दोनों जुड गये हैं पढना किताब का और रोना मेरे व्यक्ति का

लेकिन मैने जो पढा था उसे नहीं रोया था पढने ने तो मुझमें रोने का बल दिया दुख मैने पाया था बाहर किताब के जीवन से

पढ़ता जाता और रोता जाता था मैं जो पढ़ता हूँ उस पर मैं नही रोता हूँ बाहर किताब के जीवन से पाता हूँ रोने का कारण मैं पर किताब रोना संभव बनाती है.

इति

Raghuvir Sahay

The Poet

रघुवीर सहाय

Raghuvir Sahay

Reclining Nair Lady

Paired Painting

Reclining Nair Lady

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kitab Padhkar Rona carries.