
ये पंक्तियाँ मेरे निकट
Ye Panktiyan Mere Nikat
Kunwar Narayan
3 verses · ~14 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~1 min
अरे अब ऐसी कविता लिखो कि जिसमें छंद घूमकर आय घुमड़ता जाय देह में दर्द कहीं पर एक बार ठहराय
कि जिसमें एक प्रतिज्ञा करूं वही दो बार शब्द बन जाय बताऊँ बार-बार वह अर्थ न भाषा अपने को दोहराय
अरे अब ऐसी कविता लिखो कि कोई मूड़ नहीं मटकाय न कोई पुलक-पुलक रह जाय न कोई बेमतलब अकुलाय
छंद से जोड़ो अपना आप कि कवि की व्यथा हृदय सह जाय थामकर हँसना-रोना आज उदासी होनी की कह जाय ।
इति

Paired Painting
Bheeshma's Oath
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