
धूप (हाइकु)
Dhoop (Haiku)
Poornima Varman
3 verses · ~2 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
Loading the archive
MM · XXVI

5 verses · ~1 min
बहुत दिनों बाद खिड़की खोली थी साफ-साफ दिखता काँच के उस पार
लगता था नयी धूप आएगी फूल खिल जाएँगे नई पत्तियाँ उगेंगी वसंत फिर आएगा धीरे-धीरे
एक काँच खिसकाते ही मिला शीतल झोंका धीरे-धीरे क्यारी में फूल खिलने लगे कि जैसे वसंत समाया था हर कण में
अचानक गहराया नभ एक तेज़ झोंका आया रेत ही रेत बिखर गई फूलों पर - आँखों में छितरायी पंखुड़ियाँ पत्तियाँ छलछलायी आँखें
हम अक्सर भूल जाते हैं मौसम बदला करते हैं तो क्या मुझे खिड़की खोलनी ही नहीं थी? या सिखा गई मुझको जीवन का एक अध्याय।
इति

Paired Painting
Sakuntala Leaving for the Palace of King Dushyanta
Open the viewer →
If this held you
Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Khidki carries.