
एक दिन अति शान्त मन
Ek Din Ati Shant Man
Pratibha Saxena
7 verses · ~32 lines · 2 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~2 min
सागर की कन्या, विष बंधु तेहि नाते सों, ताही सों बहिनी है रंभा अरु वारुणी, वाके पिये होत मद, इह का पाये ही होत कितै गुनी अधिक इह मद-संचारिणी!
टिकै कहूँ नाहीं, कभै इहाँ, कभै उहाँ, इह के मन की तरंग, जौन भावे सो करति हैं! पति कइस कहे कुछू, बस्यो ससुरारै माहिं, छीर-सिन्धु माँहिं आँख मूँदि के रहत है! पुरातन पुरुष की वधू नवेली, अलबेली अहै तासों ही ह्वै गईं ई चंचला विहारिणी!
जा के रतनारे नयनन के कटाच्छ ही ते झूमि परे सोये हरि जाय शेष शैया पे! जाके पास रहै ताके धरा पे न परत पाँय मत्त हुई जात जन जाके अपनाये ते! तिहूँ लोक जोहै मुख किरपा हित, देखे रुख चाहे दीठ जाकी सदा सुख- संचारिणी!
देवि, कृपा दृष्टि मोंपे सदा ही बनायो, हाथ जोरति, परति पाँय सीस झुका आपुनो, तो सम न लीलामयी, मो सम पुकारी कौन मेरो अपराध सारो तोहे ही ढाँपनो! का कहौं तोहार गुण, बानी को लाज लगे मुक्त ह्वै लुटावति, ढरै जो काम दायिनी!
इति

Paired Painting
Sheshashayi Laxminarayan
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Sagar-Kanya carries.