
घंटी
Ghanti
Kunwar Narayan
1 verse · ~8 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

3 verses · ~1 min
जब अपने से छोटे, और उनसे भी छोटे रुख़सत हो, निकलते चले जाते हैं सामने से एक-एक कर, अपना जीवन अपराध लगता है
जब वंचित रह जाते हैं लोग, उस सबसे जो हमने पाया तरसते देख गुनाह लगती हैं- अपनी सुख-सुविधायें, कि दूसरे का हिस्सा हम दबाये बैठे हैं अपनी सारी क्षमतायें बेकार कि अब कौन सी सार्थकता बाकी रह गई?
भाग्यशाली हैं वे, जो जीवन-मृत्यु को सही सम्मान दे, समय से प्रस्थान कर जाते हैं
इति

Paired Painting
Shantanu and Ganga
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Prashna carries.