№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Scene from a Hindu Marriage

Hasya

मोहे टी.वी. मँगाय दे

Mohe TV Mangay De

Pratibha Saxena
1 min read 6 versesटीवीtelevisionआधुनिकता

6 verses · ~1 min

मोहे टी.वी. मँगाय दे मैं टिविया पे राजी! जा पै होइ रँगवारो टीवी करौं ओही से सादी!

काला और सुपेद न भावै,टीवी बस रंगवारो, बिना रँगन को मजा न आवे तुमहू नेक विचारो! छैल-छबीली फर्वट छोरी दो करवाय मुनादी

मरद चलेगा लंबा-नाटा काला-गोरा कोई, मोटा पातर,मूँछ-निमूछा फरक पड़े ना कोई! दिन भर बाहर रहै मरद,रौनक टीवी से हाँ,जी!

बंदर जैसा हो कोई, जा की महरारू सुन्दर, हर देखैवाले के हिय मां हूक उठै रह रह कर! सरत लगा ले कोई चाहे,हौं ही जितिहौं बाजी!

पढ़ी-लिखी तो नहीं खास पर समझूँ ढाई आखर, उइसे ही सब कहें सयानी,का होई पोथी पढ़ ज्यादा पढी-लिखी छोरी तो लगे सभी की दादी!

जइस खुदा जी खुदै देत सक्कर खोरेन का सक्कर, हमरा भी हुइ जाई कलर टीवी वाले सों चक्कर टी.वी.वाला राजी तो फिन का कर लेई काजी!

इति

Pratibha Saxena

The Poet

प्रतिभा सक्सेना

Pratibha Saxena

Scene from a Hindu Marriage

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Scene from a Hindu Marriage

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Mohe TV Mangay De carries.