
एक जनम
Ek Janam
Pratibha Saxena
6 verses · ~12 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI
2 verses · ~1 min
मछुआरा फिर से जाल समेटेगा! हो सावधान री, प्राणों की मछली , तू कितनी बार बची आई ,फिसली , हर बार नहीं बच पाता कोई भी , चुक जातीं सब भूलें पिछली-अगली! बंसी में डोरी ,डोरी में काँटा , हर बार नया भर चारा , फेंकेगा! मछुआरा फिर से जाल समेटेगा!
गहरा पानी ,हर जगह जाल फैले , क्या फँसी नहीं मछलियाँ कभी पहले? इस बार अगर बच भी निकली तो क्या , कुछ पल तल -सतहों को अपना कह ले! खेले बिन उसको चैन कहाँ आये साँसों की डोरी झटक लपेटेगा! फिर से मछुआरा जाल समेटेगा!
इति
Paired Painting
The Matsya Avatar of Lord Vishnu
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Machhuara carries.