№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Sheshashayi Laxminarayan

Shanta

एक जनम

Ek Janam

Pratibha Saxena
1 min read 6 versesजीवनमुक्तिप्रेम

6 verses · ~1 min

मुक्ति नहीं, एक जनम, मगन-मगन,!

तन्मय विशेष कुछ न शेष. पूर्ण लीन, मात्र अनुरक्ति हो असीम तृप्ति, सिक्त मन-गगन एक जनम .

धरा हो ऋतंभरा, जीवन संतृप्ति भरा तन, मन विभोर निरखें दृग कोर, मेघ वन-सघन . एक जनम!

मुक्ति नहीं, हो अनन्त राग, विरहित विराग. लहर-लहर दीप, सिहर-सिहर प्रीत नृत्य-रत किरन. एक जनम!

भर-पुरे अस्त उदय भाव-भेद शमित, परम तोष, शमित ताप. स्निग्ध दीप्तिमय गगन. एक जनम,

मुक्ति नहीं, परम परिपूर्ण मगन, लघु भले कि लघुत्तम एक जनम. जनम-जनम की मिटे थकन एक जनम!

इति

Pratibha Saxena

The Poet

प्रतिभा सक्सेना

Pratibha Saxena

Sheshashayi Laxminarayan

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Sheshashayi Laxminarayan

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ek Janam carries.