
एक दिन अति शान्त मन
Ek Din Ati Shant Man
Pratibha Saxena
7 verses · ~32 lines · 2 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

6 verses · ~1 min
मुक्ति नहीं, एक जनम, मगन-मगन,!
तन्मय विशेष कुछ न शेष. पूर्ण लीन, मात्र अनुरक्ति हो असीम तृप्ति, सिक्त मन-गगन एक जनम .
धरा हो ऋतंभरा, जीवन संतृप्ति भरा तन, मन विभोर निरखें दृग कोर, मेघ वन-सघन . एक जनम!
मुक्ति नहीं, हो अनन्त राग, विरहित विराग. लहर-लहर दीप, सिहर-सिहर प्रीत नृत्य-रत किरन. एक जनम!
भर-पुरे अस्त उदय भाव-भेद शमित, परम तोष, शमित ताप. स्निग्ध दीप्तिमय गगन. एक जनम,
मुक्ति नहीं, परम परिपूर्ण मगन, लघु भले कि लघुत्तम एक जनम. जनम-जनम की मिटे थकन एक जनम!
इति

Paired Painting
Sheshashayi Laxminarayan
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ek Janam carries.