№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Summer Landscape

Shanta

बुज़ुर्ग पेड़

Buzurg Ped

Pratibha Saxena
1 min read 2 versesपेड़treesप्रकृति

2 verses · ~1 min

कुछ रिश्ता है ज़रूर मेरा इन बुज़ुर्ग पेड़ों से! देख कर ही हरिया जाती हैं आँखें, उमग उठता है मन, वैसे ही जैसे मायके की देहरी देख, कंठ तक उमड़ आता हो कुछ! बाँहें फैलाये ये पुराने पेड़ पत्तियाँ हिलाते हैं हवा में, इँगित करते हैं अँगुलियों से - आओ न, कहाँ जा रही हो इस धूप में थोड़ी देर कर लो विश्राम हमारी छाया में!

मेरी गति-विधियों से परिचित हैं ये, मुझमें जो उठती हैं उन भावनाओं का समझते हैं ये! नासापुट ग्रहण करते हैं हवाओं में घुली गंध अपनत्व की! एक नेह-लास बढ़ कर छा लेता है मुझे, बहुत पुराना रिश्ता है मेरा! इन बुज़ुर्ग पेड़ों से!

इति

Pratibha Saxena

The Poet

प्रतिभा सक्सेना

Pratibha Saxena

Summer Landscape

Paired Painting

Summer Landscape

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Buzurg Ped carries.