№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Krishna Drishta

Shanta

बच्चा

Bachcha

Pratibha Saxena
1 min read 4 versesबच्चापूजामासूमियत

4 verses · ~1 min

नन्हा सा बच्चा , सब देखता है, सुनता है, बोलता कुछ नहीं!

हमारे सारे क्रिया -कलाप, देखता रहता है ध्यान से, दृष्टि बड़ी गहरी, पहुँच जाती है तल तक, हम जो नहीं समझते ग्रहण कर लेता है!

पूजा के उपकरण सजाए गए ,देवता की प्रतिष्ठा हुई, धूप -दीप-नैवेद्य ,फूल आरती स्तुति! वह मगन मन देखता रहा! दोनो नन्हे-नन्हे हाथ जोड़कर प्रणाम करवाया, "जै करो, बेटा!" अभिभूत था बच्चा!

अब तो राहों मे चौबारों मे, दूकानो मे, बाज़ारों मे, जहाँ भी सौन्दर्य और आनन्द पाता है, तुरंत दोनो हाथ जोड़कर "जै" कर लेता है।

इति

Pratibha Saxena

The Poet

प्रतिभा सक्सेना

Pratibha Saxena

Krishna Drishta

Paired Painting

Krishna Drishta

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Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Bachcha carries.