№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Saraswati in Concert

Shringara

न जाने आज किधर

Na Jane Aaj Kidhar

Kavi Pradeep
2 min read 4 versesनावboatप्रियतम

4 verses · ~2 min

न जाने किधर आज मेरी नाव चली रे न जाने किधर आज मेरी नाव चली रे चली रे चली रे मेरी नाव चली रे चली रे चली रे मेरी नाव चली रे कोई कहे यहाँ चली कोई कहे वहाँ चली कोई कहे यहाँ चली कोई कहे वहाँ चली मन ने कहा पिया के गाँव चली रे पिया के गाँव चली रे चली रे चली रे मेरी नाव चली रे

मन के मीत मेरे मिल जा जळी दुनिया के सागर में नाव मेरी चल दी मन के मीत मेरे मिल जा जळी दुनिया के सागर में नाव मेरी चल दी बिलकुल अकेली, बिलकुल अकेली अकेली चली रे चली रे चली रे मेरी नाव चली रे न जाने किधर आज मेरी नाव चली रे चली रे चली रे मेरी नाव चली रे

ऊँची नीची लहरों पे नाव मेरी डोले मन में प्रीत मेरी पिहू पिहू बोले ऊँची नीची लहरों पे नाव मेरी डोले मन में प्रीत मेरी पिहू पिहू बोले मेरे मन मुझ को बता, मेरी मंज़िल का पता मेरे मन मुझ को बता, मेरी मंज़िल का पता बोल मेरे साजन की कौन गली रे बोल मेरे साजन की कौन गली रे चली रे चली रे मेरी नाव चली रे

न जाने किधर...

इति

Kavi Pradeep

The Poet

प्रदीप

Kavi Pradeep

Saraswati in Concert

Paired Painting

Saraswati in Concert

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Na Jane Aaj Kidhar carries.