№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Dhola and Maru on a Camel

Shringara

गा रही है ज़िंदगी हर तरफ़

Ga Rahi Hai Zindagi Har Taraf

Kavi Pradeep
2 min read 4 versesप्रेमloveशृंगार

4 verses · ~2 min

गा रही है ज़िंदगी हर तरफ़ बहार में किस लिये चार चांद लग गये हैं तेरे मेरे प्यार में इस लिये)

आ गया आँचल किसी का आज मेरे हाथ में है चकोरी आज अपने चँद्रमा के साथ में चल पडी दो किश्तीयाँ आज एक धार में किस लिये चार चांद लग गये हैं तेरे मेरे प्यार में इस लिये गा रही है ज़िंदगी हर तरफ़ बहार में किस लिये चार चांद लग गये हैं तेरे मेरे प्यार में इस लिये

छू रही तन मन को मेरे प्रीत की पुर्वाईयाँ दूर की अम्ब्राईओं में गुँजती शेहनाईयाँ सौ गुना निखार है आज तो सिंगार में किस लिये चार चांद लग गये हैं तेरे मेरे प्यार में इस लिये गा रही है ज़िंदगी हर तरफ़ बहार में किस लिये चार चांद लग गये हैं तेरे मेरे प्यार में इस लिये

ज़िंदगी भर के लिये तू बाँह मेरी थाम ले जब तलक ये साँस है हर साँस तेरा नाम ले इक नयी दुनिया खडी अपने इंतेज़ार में किस लिये चार चांद लग गये हैं तेरे मेरे प्यार में इस लिये गा रही है ज़िंदगी हर तरफ़ बहार में किस लिये चार चांद लग गये हैं तेरे मेरे प्यार में इस लिये

इति

Kavi Pradeep

The Poet

प्रदीप

Kavi Pradeep

Dhola and Maru on a Camel

Paired Painting

Dhola and Maru on a Camel

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ga Rahi Hai Zindagi Har Taraf carries.