№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Girl with a Vase

Shanta

मेरे मन हँसते हुए चल

Mere Man Haste Hue Chal

Kavi Pradeep
2 min read 4 versesहौसलाcourageधैर्य

4 verses · ~2 min

आज नहीं तो कल बिखर जायेंगे ये बादल हँसते हुए चल मेरे मन हँसते हुए चल बीती हुई बातों पे बीती हुई बातों पे अब रोने से क्या फल हँसते हुए चल मेरे मन हँसते हुए चल

गुज़र चुका है जो ज़माना गुज़र चुका है जो ज़माना तू भूल जा उसकी धुन जो आनेवाले दिन हैं उनकी आवाज़ को सुन मुझे पता है बड़े बड़े तूफ़ान हैं तेरे सामने खुशी खुशी तू सहता जा जो कुछ भी दिया है राम ने अपनी तरह कितनों के यहाँ टूट चुके हैं महल हँसते हुए चल मेरे मन हँसते हुए चल

फूलों का सेहरा बाँधनेवाले इस दुनिया में अनेक जो काँटों का ताज पहन ले वो लाखों में एक मेरे मन वो लाखों में एक गिरे बिजलियां गिरे बिजलियां गिरे बिजलियां फिर भी अपनी टेक से तू मत टल हँसते हुए चल मेरे मन हँसते हुए चल

मेरी मुहब्बत आज जलाना सम्भल के ज़रा चिराग मेरी मुहब्बत आज जलाना सम्भल के ज़रा चिराग मैं काग़ज़ के घर में बैठी लग न जाये आग लग न जाये आग मेरी क़िस्मत में लग न जाये दाग मेरी इज़्ज़त में इस देश की नारी को इस देश की नारी को कोई कह न दे दुरबल हँसते हुए चल मेरे मन हँसते हुए चल

इति

Kavi Pradeep

The Poet

प्रदीप

Kavi Pradeep

Girl with a Vase

Paired Painting

Girl with a Vase

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Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Mere Man Haste Hue Chal carries.