
अब ख़ुशी है न कोई ग़म रुलाने वाला
Ab Khushi Hai Na Koi Gham Rulaane Wala
Nida Fazli
5 verses · ~9 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
Loading the archive
MM · XXVI

Shanta
Apni Marzi Se Kahan Apne Safar Ke Hum Hain
Nida Fazli6 verses · ~1 min
~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*
अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं
पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम हैं
वक़्त के साथ है मिट्टी का सफ़र सदियों तक किसको मालूम कहाँ के हैं किधर के हम हैं
चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफ़िर का नसीब सोचते रहते हैं कि किस राहगुज़र के हम हैं
गिनतियों में ही गिने जाते हैं हर दौर में हम हर क़लमकार की बेनाम ख़बर के हम हैं
इति

Paired Painting
A Parsee Girl
Open the viewer →
If this held you
Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Apni Marzi Se Kahan Apne Safar Ke Hum Hain carries.