№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Tilottama

Adbhuta

चौपाटी का सूर्यास्त

Chowpatty Ka Suryast

Gopal Singh Nepali
2 min read 6 versesचौपाटीChowpattyसूर्यास्त

6 verses · ~2 min

चौपाटी: बम्बई का समुद्र-तट

यह रंगों का जाल सलोना, यह रंगों का जाल किरण-किरण में फहराता है नयन-नयन में लहराता है चिड़ियों-सा उड़ता आता है यह रंगों का जाल

सहज-सरल-सुन्दर रूपों का यह बादल रंगीन कोमल-चंचल झलमल-झलमल यह चल-दल रंगीन लिए शिशिर का कम्पन-सिहरन और शरद का उज्जवल आनन नव बसन्त का मुकुलित कानन उड़ता आता प्रतिपल-प्रतिक्षण यह रूपों का जाल मनोहर, यह रूपों का जाल

मेरी आँखें कितना देखें उतना चाहें जितना देखें कलना देखें, छलना देखें सत्य हो रहा सपना देखें यह रंगों का जाल सलोना, यह रंगों का जाल

और उड़ो तुम मेरे बादल और धुलो तुम मेरे शतदल और हिलो तुम मेरे चलदल चलो-चलो तुम मेरे चंचल बरसो तो मेरे आँगन में ठहरो तो मेरे इस मन में मुझको प्यारा-प्यारा लगता, यह रंगों का जाल यह रंगों का जाल सलोना, यह रंगों का जाल

रचनाकाल: 17 जुलाई 1944, बम्बई

इति

Gopal Singh Nepali

The Poet

गोपाल सिंह नेपाली

Gopal Singh Nepali

Tilottama

Paired Painting

Tilottama

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Chowpatty Ka Suryast carries.