№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Urvashi

Shringara

सुनो चारुशिला

Suno Charushila

Naresh Saxena
1 min read 5 versesचारुशिलाप्रेमस्मृति

5 verses · ~1 min

01 फ़रवरी 2011 को दिवंगत पत्नी विजय के लिए

तुम अपनी दो आँखों से देखती हो एक दृश्य दो हाथों से करती हो एक काम दो पाँवों से दो रास्तों पर नहीं एक ही पर चलती हो

सुनो चारुशिला! एक रंग और एक रंग मिलकर एक ही रंग होता है एक बादल और एक बादल मिलकर एक ही बादल होता है एक नदी और एक नदी मिलकर एक ही नदी होती है

नदी नहीं होंगे हम बादल नहीं होंगे हम रंग नहीं होंगे तो फिर क्या होंगे अच्छा ज़रा सोचकर बताओ कि एक मैं और तुम मिलकर कितने हुए

क्या कोई बता सकता है कि तुम्हारे बिन मेरी एक वसंत ऋतु कितने फूलों से बन सकती है और अगर तुम हो तो क्या मैं बना नहीं सकता एक तारे से अपना आकाश

इति

Naresh Saxena

The Poet

नरेश सक्सेना

Naresh Saxena

Urvashi

Paired Painting

Urvashi

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Suno Charushila carries.