
कोहबर
Kohabar
Buddhinath Mishra
5 verses · ~13 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shringara
Sahayatra Ke Saath Baras
Ramdarash Mishra6 verses · ~1 min
साथ-साथ चलते जाना कब साठ बरस बीते!
एक हाथ में थी कविता, दूजे में थी रोटी हम तानते रहे दोनों की लय छोटी-छोटी चलते रहे सफ़र में हम यों ही खाते-पीते!
जब आया जलजला, पाँव काँपने लगे डर से बढ़कर थाम लिया हमने इक-दूजे को कर से कितना कुछ टूटा-फूटा, पर हम न कभी रीते!
छोटे-छोटे सुख-पंछी फड़काते थे पाँखें छोटे-छोटे सपनों से भर आती थीं आँखें गिरे-पड़े, कुछ हारे-से भी, पर आख़िर जीते!
ख़ुद के गिरने पर उठकर तुम कितना हँसती थीं पर मेरी छोटी-सी डगमग तुमको डँसती थी भर आते थे जीवन-रस से, पल विष-से तीते!
जब-जब दूर हुआ घर से, तनहा हो घबराया तब-तब लगा मुझे, कोई स्वर तुम जैसा आया- घबराना मत तनहाई से, मैं तो हूँ मीते!
इति

Paired Painting
Mother and Child
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Sahayatra Ke Saath Baras carries.