№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Chitra Lekha

Shringara

कभी तो आसमाँ से चांद उतरे जाम हो जाये

Kabhi To Aasman Se Chand Utre Jaam Ho Jaye

Bashir Badr
1 min read 7 versesचाँदmoonशाम

7 verses · ~1 min

कभी तो आसमाँ से चांद उतरे जाम हो जाये तुम्हारे नाम की इक ख़ूबसूरत शाम हो जाये

हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाये चराग़ों की तरह आँखें जलें जब शाम हो जाये

अजब हालात थे यूँ दिल का सौदा हो गया आख़िर मोहब्बत की हवेली जिस तरह नीलाम हो जाये

समंदर के सफ़र में इस तरह आवाज़ दो हमको हवाएँ तेज़ हों और कश्तियों में शाम हो जाये

मैं ख़ुद भी एहतियातन उस गली से कम गुज़रता हूँ कोई मासूम क्यों मेरे लिये बदनाम हो जाये

मुझे मालूम है उस का ठिकाना फिर कहाँ होगा परिंदा आसमाँ छूने में जब नाकाम हो जाये

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाये

इति

Bashir Badr

The Poet

बशीर बद्र

Bashir Badr

Chitra Lekha

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Chitra Lekha

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