
प्यारे भारत देश
Pyare Bharat Desh
Makhanlal Chaturvedi
9 verses · ~23 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

6 verses · ~1 min
उठ महान! तूने अपना स्वर यों क्यों बेंच दिया? प्रज्ञा दिग्वसना, कि प्राण् का पट क्यों खेंच दिया?
वे गाये, अनगाये स्वर सब वे आये, बन आये वर सब जीत-जीत कर, हार गये से प्रलय बुद्धिबल के वे घर सब!
तुम बोले, युग बोला अहरह गंगा थकी नहीं प्रिय बह-बह इस घुमाव पर, उस बनाव पर कैसे क्षण थक गये, असह-सह!
पानी बरसा बाग ऊग आये अनमोले रंग-रँगी पंखुड़ियों ने अन्तर तर खोले;
पर बरसा पानी ही था वह रक्त न निकला! सिर दे पाता, क्या कोई अनुरक्त न निकला?
प्रज्ञा दिग्वसना? कि प्राण का पट क्यों खेंच दिया! उठ महान् तूने अपना स्वर यों क्यों बेंच दिया!
इति

Paired Painting
Birth of Ganga on Earth
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Uth Mahan carries.