
बसंत मनमाना
Basant Manmana
Makhanlal Chaturvedi
3 verses · ~16 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shringara
Madhur! Badal, Aur Badal, Aur Badal
Makhanlal Chaturvedi5 verses · ~1 min
मधुर! बादल, और बादल, और बादल आ रहे हैं और संदेशा तुम्हारा बह उठा है, ला रहे हैं।।
गरज में पुस्र्षार्थ उठता, बरस में कस्र्णा उतरती उग उठी हरीतिमा क्षण-क्षण नया श्रृङ्गर करती बूँद-बूँद मचल उठी हैं, कृषक-बाल लुभा रहे हैं।। नेह! संदेशा तुम्हारा बह उठा है, ला रहे हैं।।
तड़ित की तह में समायी मूर्ति दृग झपका उठी है तार-तार कि धार तेरी, बोल जी के गा उठी हैं पंथियों से, पंछियों से नीड़ के स्र्ख जा रहे हैं मधुर! बादल, और बादल, और बादल आ रहे हैं।।
झाड़ियों का झूमना, तस्र्-वल्लरी का लहलहाना द्रवित मिलने के इशारे, सजल छुपने का बहाना। तुम नहीं आये, न आवो, छवि तुम्हारी ला रहे हैं।। मधुर! बादल, और बादल, और बादल छा रहे हैं,
और संदेशा तुम्हारा बह उठा है, ला रहे हैं।।
इति

Paired Painting
Damayanti and the Swan
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Madhur! Badal, Aur Badal, Aur Badal carries.