№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Rama, Sita and Lakshman in the Forest

Shanta

कैसी है पहिचान तुम्हारी

Kaisi Hai Pahichan Tumhari

Makhanlal Chaturvedi
1 min read 7 versesपहचानidentityराह

7 verses · ~1 min

कैसी है पहिचान तुम्हारी राह भूलने पर मिलते हो!

पथरा चलीं पुतलियाँ, मैंने विविध धुनों में कितना गाया दायें-बायें, ऊपर-नीचे दूर-पास तुमको कब पाया

धन्य-कुसुम! पाषाणों पर ही तुम खिलते हो तो खिलते हो। कैसी है पहिचान तुम्हारी राह भूलने पर मिलते हो!!

किरणों प्रकट हुए, सूरज के सौ रहस्य तुम खोल उठे से किन्तु अँतड़ियों में गरीब की कुम्हलाये स्वर बोल उठे से!

काँच-कलेजे में भी कस्र्णा- के डोरे ही से खिलते हो। कैसी है पहिचान तुम्हारी राह भूलने पर मिलते हो।।

प्रणय और पुस्र्षार्थ तुम्हारा मनमोहिनी धरा के बल हैं दिवस-रात्रि, बीहड़-बस्ती सब तेरी ही छाया के छल हैं।

प्राण, कौन से स्वप्न दिख गये जो बलि के फूलों खिलते हो। कैसी है पहिचान तुम्हारी राह भूलने पर मिलते हो।।

इति

Makhanlal Chaturvedi

The Poet

माखनलाल चतुर्वेदी

Makhanlal Chaturvedi

Rama, Sita and Lakshman in the Forest

Paired Painting

Rama, Sita and Lakshman in the Forest

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kaisi Hai Pahichan Tumhari carries.