
संध्या के बस दो बोल सुहाने लगते हैं
Sandhya Ke Bas Do Bol Suhane Lagate Hain
Makhanlal Chaturvedi
9 verses · ~30 lines · 2 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shanta
Is Tarah Dhakkan Lagaya Raat Ne
Makhanlal Chaturvedi6 verses · ~1 min
इस तरह ढक्कन लगाया रात ने इस तरफ़ या उस तरफ़ कोई न झाँके।
बुझ गया सूर्य बुझ गया चाँद, तस्र् ओट लिये गगन भागता है तारों की मोट लिये!
आगे-पीछे,ऊपर-नीचे अग-जग में तुम हुए अकेले छोड़ चली पहचान, पुष्पझर रहे गंधवाही अलबेले।
ये प्रकाश के मरण-चिन्ह तारे इनमें कितना यौवन है? गिरि-कंदर पर, उजड़े घर पर घूम रहे नि:शंक मगन हैं।
घूम रही एकाकिनि वसुधा जग पर एकाकी तम छाया कलियाँ किन्तु निहाल हो उठीं तू उनमें चुप-चुप भर आया
मुँह धो-धोकर दूब बुलाती चरणों में छूना उकसाती साँस मनोहर आती-जाती मधु-संदेशे भर-भर लाती।
इति

Paired Painting
Lord Shiva and Parvati as Hunter and Huntress
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Is Tarah Dhakkan Lagaya Raat Ne carries.