
साँस के प्रश्नचिन्हों, लिखी स्वर-कथा
Saans Ke Prashnachinhon, Likhi Svara-Katha
Makhanlal Chaturvedi
7 verses · ~22 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shringara
Chalo Chhiya-Chhi Ho Antar Mein
Makhanlal Chaturvedi16 verses · ~2 min
चलो छिया-छी हो अन्तर में! तुम चन्दा मैं रात सुहागन
चमक-चमक उट्ठें आँगन में चलो छिया-छी हो अन्तर में!
बिखर-बिखर उट्ठो, मेरे धन, भर काले अन्तस पर कन-कन, श्याम-गौर का अर्थ समझ लें
जगत पुतलियाँ शून्य प्रहर में चलो छिया-छी हो अन्तर में!
किरनों के भुज, ओ अनगिन कर मेलो, मेरे काले जी पर उमग-उमग उट्ठे रहस्य,
गोरी बाँहों का श्याम सुन्दर में चलो छिया-छी हो अन्तर में!
मत देखो, चमकीली किरनो जग को, ओ चाँदी के साजन! कहीं चाँदनी मत मिल जावे
जग-यौवन की लहर-लहर में चलो छिया-छी हो अन्तर में!
चाहों-सी, आहों-सी, मनु- हारों-सी, मैं हूँ श्यामल-श्यामल बिना हाथ आये छुप जाते
हो, क्यों! प्रिय किसके मंदिर में चलो छिया-छी हो अन्तर में!
कोटि कोटि दृग! मैं जगमग जो- हूँ काले स्वर, काले क्षण गिन, ओ उज्ज्वल श्रम कुछ छू दो
पटरानी को तुम अमर उभर में चलो छिया-छी हो अन्तर में!
चमकीले किरनीले शस्त्रों काट रहे तम श्यामल तिल-तिल ऊषा का मरघट साजोगे?
यही लिख सके चार पहर में? चलो छिया-छी हो अन्तर में!
ये अंगारे, कहते आये ये जी के टुकडे, ये तारे `आज मिलोगे’, `आज मिलोगे',
पर हम मिलें न दुनिया-भर में चलो छिया-छी हो अन्तर में!
इति

Paired Painting
Lord Shiva and Parvati as Hunter and Huntress
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Chalo Chhiya-Chhi Ho Antar Mein carries.