№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
To the Temple

Shanta

गुणगान

Gungaan

Maithili Sharan Gupt
2 min read 5 versesभक्तिdevotionईश्वर

5 verses · ~2 min

तेरे घर के द्वार बहुत हैं, किसमें हो कर आऊं मैं? सब द्वारों पर भीड़ मची है, कैसे भीतर जाऊं मैं?

द्बारपाल भय दिखलाते हैं, कुछ ही जन जाने पाते हैं, शेष सभी धक्के खाते हैं, क्यों कर घुसने पाऊं मैं? तेरे घर के द्वार बहुत हैं, किसमें हो कर आऊं मैं?

तेरी विभव कल्पना कर के, उसके वर्णन से मन भर के, भूल रहे हैं जन बाहर के कैसे तुझे भुलाऊं मैं? तेरे घर के द्वार बहुत हैं, किसमें हो कर आऊं मैं?

बीत चुकी है बेला सारी, किंतु न आयी मेरी बारी, करूँ कुटी की अब तैयारी, वहीं बैठ गुन गाऊं मैं। तेरे घर के द्वार बहुत हैं, किसमें हो कर आऊं मैं?

कुटी खोल भीतर जाता हूँ तो वैसा ही रह जाता हूँ तुझको यह कहते पाता हूँ- 'अतिथि, कहो क्या लाउं मैं?' तेरे घर के द्वार बहुत हैं, किसमें हो कर आऊं मैं?

इति

Maithili Sharan Gupt

The Poet

मैथिलीशरण गुप्त

Maithili Sharan Gupt

To the Temple

Paired Painting

To the Temple

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Gungaan carries.