
मधुर-मधुर मेरे दीपक जल!
Madhur-Madhur Mere Deepak Jal!
Mahadevi Varma
9 verses · ~28 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

5 verses · ~1 min
क्या जलने की रीति शलभ समझा दीपक जाना
घेरे हैं बंदी दीपक को ज्वाला की वेला दीन शलभ भी दीप शिखा से सिर धुन धुन खेला इसको क्षण संताप भोर उसको भी बुझ जाना
इसके झुलसे पंख धूम की उसके रेख रही इसमें वह उन्माद न उसमें ज्वाला शेष रही जग इसको चिर तृप्त कहे या समझे पछताना
प्रिय मेरा चिर दीप जिसे छू जल उठता जीवन दीपक का आलोक शलभ का भी इसमें क्रंदन युग युग जल निष्कंप इसे जलने का वर पाना
धूम कहाँ विद्युत लहरों से हैं निश्वास भरा झंझा की कंपन देती चिर जागृति का पहरा जाना उज्जवल प्रात न यह काली निशि पहचाना
इति

Paired Painting
Jauhar
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kya Jalne Ki Reet carries.