№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Jauhar

Shringara

क्या जलने की रीत

Kya Jalne Ki Reet

Mahadevi Varma
1 min read 5 versesदीपकपतंगाजलना

5 verses · ~1 min

क्या जलने की रीति शलभ समझा दीपक जाना

घेरे हैं बंदी दीपक को ज्वाला की वेला दीन शलभ भी दीप शिखा से सिर धुन धुन खेला इसको क्षण संताप भोर उसको भी बुझ जाना

इसके झुलसे पंख धूम की उसके रेख रही इसमें वह उन्माद न उसमें ज्वाला शेष रही जग इसको चिर तृप्त कहे या समझे पछताना

प्रिय मेरा चिर दीप जिसे छू जल उठता जीवन दीपक का आलोक शलभ का भी इसमें क्रंदन युग युग जल निष्कंप इसे जलने का वर पाना

धूम कहाँ विद्युत लहरों से हैं निश्वास भरा झंझा की कंपन देती चिर जागृति का पहरा जाना उज्जवल प्रात न यह काली निशि पहचाना

इति

Mahadevi Varma

The Poet

महादेवी वर्मा

Mahadevi Varma

Jauhar

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Jauhar

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kya Jalne Ki Reet carries.