
नैया पड़ी मंझधार गुरु बिन कैसे लागे पार
Naiya Padi Manjhdhaar Guru Bin Kaise Laage Paar
Kabir
2 verses · ~10 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

3 verses · ~1 min
नैया पड़ी मंझधार गुरु बिन कैसे लागे पार॥
साहिब तुम मत भूलियो लाख लो भूलग जाये। हम से तुमरे और हैं तुम सा हमरा नाहिं। अंतरयामी एक तुम आतम के आधार। जो तुम छोड़ो हाथ प्रभुजी कौन उतारे पार॥ गुरु बिन कैसे लागे पार॥
मैं अपराधी जन्म को मन में भरा विकार। तुम दाता दुख भंजन मेरी करो सम्हार। अवगुन दास कबीर के बहुत गरीब निवाज़। जो मैं पूत कपूत हूं कहौं पिता की लाज॥ गुरु बिन कैसे लागे पार॥
इति

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Naiya Padi Manjhdhar carries.